The Sultans of Delhi and the Mughal emperors did not find it profitable and practicable to interfere with these and therefore left them alone . दिल्ली के सुल्तानों और मुगल बादशाहों ने इसके साथ छेड़खानी करना लाभप्रद और व्यावहारिक नहीं समझा और उन्हें पहले की तरह अपना काम करने दिया .